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जालौर

रक्षाबंधन पर भी खाली रही व्यावसायिक प्रशिक्षकों की जेब

6 से 12 माह का मानदेय बकाया

रक्षाबंधन पर भी खाली रही व्यावसायिक प्रशिक्षकों की जेब


जालौर। राजस्थान के राजकीय विद्यालयों में कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों को रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर भी समय पर मानदेय नहीं मिलने से उनमें आक्रोश बढ़ता जा रहा है। प्रशिक्षकों का कहना है कि वे लगातार विद्यार्थियों को रोजगारपरक एवं कौशल आधारित शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, लेकिन स्वयं अपने मेहनताने के लिए महीनों से इंतजार करने को मजबूर हैं।
व्यावसायिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र जी फौजी ने सरकार एवं शिक्षा विभाग से लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान करवाने तथा भविष्य में समयबद्ध भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
ICA, LNJ और SBIN के प्रशिक्षकों का मानदेय लंबित
प्रशिक्षकों के अनुसार संबंधित कंपनियों द्वारा मानदेय भुगतान में लगातार देरी की जा रही है। जानकारी के मुताबिक ICA कंपनी का करीब 6 माह, LNJ कंपनी का करीब 12 माह और SBIN कंपनी का करीब 8 माह का मानदेय बकाया बताया जा रहा है। लंबे समय से भुगतान लंबित रहने के कारण प्रशिक्षकों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक परेशानियां बढ़ती जा रही हैं।
“प्रशिक्षकों के साथ न्याय होना चाहिए”
प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र जी फौजी ने कहा कि व्यावसायिक प्रशिक्षक पूरी जिम्मेदारी के साथ राजकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को कौशल प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसके बावजूद 6, 8 और 12 माह तक मानदेय के लिए इंतजार करना गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि सरकार व्यावसायिक शिक्षा को मजबूत करने की बात कर रही है, लेकिन इस व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी व्यावसायिक प्रशिक्षकों को समय पर मानदेय नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर प्रशिक्षकों का पूरा बकाया भुगतान करवाना चाहिए।
विभाग और कंपनियों के बीच फंसे प्रशिक्षक
प्रशिक्षकों का कहना है कि समस्या लेकर विभागीय अधिकारियों के पास जाने पर कई बार उन्हें बताया जाता है कि वे विभाग के प्रत्यक्ष कर्मचारी नहीं हैं। वहीं, संबंधित कंपनियों से संपर्क करने पर विभाग से भुगतान प्राप्त नहीं होने की बात कही जाती है। ऐसे में प्रशिक्षकों के सामने सवाल है कि वे अपनी समस्या लेकर आखिर जाएं तो जाएं कहां।
त्योहारों पर भी मानदेय का इंतजार
प्रशिक्षकों का कहना है कि दीपावली, होली और अब रक्षाबंधन जैसे त्योहार भी निकल गए, लेकिन कई प्रशिक्षकों को उनका मेहनताना समय पर नहीं मिल पाया। परिवार की जरूरतों और त्योहारों के खर्च के बीच महीनों तक मानदेय का इंतजार उनके लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।
संघ ने रखीं प्रमुख मांगें
व्यावसायिक शिक्षक संघ ने सरकार एवं शिक्षा विभाग से मांग की है कि—
सभी कंपनियों के अधीन कार्यरत प्रशिक्षकों का समस्त बकाया मानदेय तत्काल जारी करवाया जाए।
भविष्य में मानदेय भुगतान की समयबद्ध व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
विभागीय निर्देशों की पालना नहीं करने वाली कंपनियों की जवाबदेही तय की जाए।
आगामी टेंडर प्रक्रिया में कंपनियों के भुगतान रिकॉर्ड को गंभीरता से लिया जाए।
व्यावसायिक प्रशिक्षकों के लिए स्थायी एवं सुरक्षित रोजगार नीति बनाई जाए।
ठेका प्रथा से उत्पन्न अस्थिरता का स्थायी समाधान किया जाए।
महेंद्र जी फौजी ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में राजस्थान में व्यावसायिक शिक्षा को मजबूत करना चाहती है तो प्रशिक्षकों की समस्याओं का स्थायी समाधान करना होगा।
अब प्रशिक्षकों की नजर सरकार और शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर है। सवाल यह है कि रक्षाबंधन भी इंतजार में बीत गया, क्या आने वाले त्योहार पर भी व्यावसायिक प्रशिक्षकों को अपने मेहनत के मानदेय के लिए इंतजार करना पड़ेगा?

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