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चित्तौड़गढ़

रावतभाटा परमाणु बिजली परियोजना की यूनिट-8 में ईंधन भरना शुरू, 700 मेगावाट बिजली का होगा उत्पादन

राजस्थान के रावतभाटा परमाणु बिजलीघर की 700 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट-8 में प्रारंभिक ईंधन भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जानिए कब शुरू होगा बिजली उत्पादन।

रावतभाटा परमाणु बिजली परियोजना की यूनिट-8 में ईंधन भरना शुरू, 700 मेगावाट बिजली का होगा उत्पादन

रावतभाटा, राजस्थान || राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले स्थित रावतभाटा परमाणु बिजलीघर में एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की गई है। न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड यानी NPCIL ने राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना की यूनिट-8 में प्रारंभिक परमाणु ईंधन भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

यह यूनिट स्वदेशी तकनीक पर आधारित 700 मेगावाट क्षमता का प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर है। ईंधन भरने की प्रक्रिया पूरी होने और सभी आवश्यक परीक्षण सफल रहने के बाद यूनिट को बिजली उत्पादन के लिए तैयार किया जाएगा।

NPCIL के अनुसार, यूनिट-8 में प्रारंभिक ईंधन भरने का काम 19 सितंबर 2026 को दोपहर 3:18 बजे शुरू हुआ। इस दौरान परियोजना और संचालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

सुरक्षा जांच के बाद मिली अनुमति

परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड यानी AERB ने विस्तृत सुरक्षा मूल्यांकन, प्रमुख प्रणालियों की जांच और परियोजना स्थल की तैयारियों की समीक्षा करने के बाद ईंधन भरने की अनुमति दी।

परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में ईंधन भरने से पहले सुरक्षा से जुड़े कई परीक्षण किए जाते हैं। सभी निर्धारित शर्तों को पूरा करने के बाद ही रिएक्टर में परमाणु ईंधन डालने की प्रक्रिया शुरू होती है।

अब आगे क्या होगा?

प्रारंभिक ईंधन भरने के बाद यूनिट को पहली बार नियंत्रित परमाणु विखंडन प्रक्रिया तक ले जाया जाएगा। तकनीकी भाषा में इसे “फर्स्ट अप्रोच टू क्रिटिकलिटी” कहा जाता है।

इसके बाद विभिन्न स्तरों पर रिएक्टर का परीक्षण किया जाएगा और फिर बिजली उत्पादन शुरू होगा। ईंधन भरने से व्यावसायिक संचालन तक की पूरी प्रक्रिया में सामान्यतः छह से आठ महीने लग सकते हैं। यूनिट के चालू वित्तीय वर्ष में व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने की संभावना जताई गई है।

राजस्थान को क्या लाभ होगा?

रावतभाटा की यूनिट-8 पूरी क्षमता से शुरू होने पर देश की परमाणु बिजली उत्पादन क्षमता में 700 मेगावाट की बढ़ोतरी होगी। इससे राजस्थान सहित अन्य राज्यों की बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिलेगी।

परमाणु ऊर्जा से बिजली उत्पादन के दौरान कोयला आधारित बिजलीघरों की तुलना में कार्बन उत्सर्जन बहुत कम होता है। इसलिए इस परियोजना को स्वच्छ और दीर्घकालिक ऊर्जा उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

स्वदेशी परमाणु कार्यक्रम को मजबूती

यूनिट-8 देश में लगाए जा रहे 700 मेगावाट क्षमता वाले 16 स्वदेशी परमाणु रिएक्टरों की श्रृंखला का चौथा रिएक्टर है। इससे पहले गुजरात के काकरापार परमाणु बिजलीघर की यूनिट-3 और यूनिट-4 तथा रावतभाटा की यूनिट-7 व्यावसायिक संचालन में आ चुकी हैं।

रावतभाटा परियोजना स्थल पर प्रस्तावित यूनिट-9 और यूनिट-10 के लिए भू-तकनीकी जांच भी 19 सितंबर से शुरू कर दी गई है। यह जांच दोनों इकाइयों की आधारभूत संरचना तैयार करने की दिशा में शुरुआती कदम है।

देश में आठ अन्य रिएक्टर निर्माणाधीन

रावतभाटा यूनिट-8 के अलावा NPCIL देश में आठ अन्य परमाणु रिएक्टरों का निर्माण कर रहा है। इनमें हरियाणा के गोरखपुर में दो, कर्नाटक के कैगा में दो और तमिलनाडु के कुडनकुलम में चार रिएक्टर शामिल हैं।

रावतभाटा की नई यूनिट का आगे बढ़ना भारत के स्वदेशी परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम और भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

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